Duct System Kya Hai | What is Duct System in a Car

Duct System in Hindi: क्या आप Duct System Kya Hai के बारे में जानते है आप कार में लगे AC के बारे में जानते ही होंगे जो कार को ठंडा करने में उपयोग किया जाता है AC में जो हवा का फ्लो जिस उपकरण में होता है उसे Dust system कहते है

चलिए जानते है Duct system kya hai पूरी जानकारी स्टेप बय स्टेप

Duct System Kya Hai (What is Duct System)

Duct system का मुख्य कार्य, (Duct System Air) हवा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाता है | उदाहरण के लिए एयर हैंडलिंग यूनिट (Air Handling Unit) एयर वाशर से हवा को ठंडा किये जाने वाले कमरे तक पहुंचने के लिए डक्ट सिस्टम का प्रयोग किया जाता है इसके आलावा ये कमरे की हवा को वापस एयर कंडीशनर तक पहुंचने का कार्य भी करता है |

Duct system kya hai
Duct system kya hai

एयर कंडीशनर कार्यो के लिए दो प्रकार के air Duct System में हवा की प्रारंभिक गति 760 मीटर / मिनट है तो इसे लो वेलोसिटी सिस्टम (Low Velocity System) कहा जाता है 760 मीटर / मिनट से अधिक गति होने पर इसे हाई वेलोसिटी सिस्टम (High Velocity System) कहा जाता है |

सामान्यता Air Condisner से हवा की गति 360 से 600 मीटर / मिनट रखी जाती है | रीटर्न एयर डक्ट से हवा की गति, लो वेलोसिटी दोनों सिस्टम में Low ही रखी जाती है |

डक्ट का साइज के बारे में (How to use Duct size)

डक्ट का साइज इस प्रकार निर्धारित किया जाता है कि इसे उपलब्ध स्थान में लगाया जा सके | साइज के अपेक्षा डक्ट के आकार-प्रकार पर विषेस ध्यान देना आवशयक होता है क्योँकि डक्ट में हवा के बहने से घर्सण के कारण प्रेसर में कमी आती है

यदि छोटे साइज के डक्ट में से अधिक प्रेसर प्रभावित होगा तो घर्षण अधिक होगा, जिससे प्रेसर में कमी आएगी | हवा से आवशक मात्रा प्राप्त करने के लिए लगाए गये फेन पर Air Distribution System में विभिन्न उपकरणों के द्वारा रुकावटें उत्प्न्न होती है

जैसे की Cooling Coil, एयर वाशर, फ़िल्टर सप्लाई और रीटर्न एयर आउटलेटस, डेम्पेर्स आदि के अलावा डक्ट सिस्टम के द्वारा भी रुकावटे उतपन्न होती है इस प्रकार फेन अनेको रुकावटों के बीच कार्य करता है | इससे फेन, हवा की आवशयक मात्रा प्रदान करने के लिए अधिक विधुत की खपत करता है इसके आलावा जब गति में वृद्धि होती है

तो हवा के गति में आने के कारण नवाइस लेवल में भी वृद्धि होती है इन कारणों से डक्ट में हवा की गति को लो लेवल पर रखा जाता है | इससे डक्ट का साइज और डक्ट में प्रयोग किये गए पदार्थ की कीमत में कमी आ जाती है

इसके अलावा फेन भी दी गई दर पर हवा के बहाव के लिए कम पावर की खपत करता है |

इसके अलावा डक्ट में हवा के प्रेसर में निम्नं दो कारणों से भी लोसेस हो जाते है-

फ्रिक्शनल लोसेस

यह मुख्य रूप से सतह (Surface) के घर्षण के कारण उत्प्न्न हो जाता है |

डायनामिक लोसेस

यह हवा के बहाव की दिशा में अचानक परिवर्तन होने से उतपन्न होता है

फ्रिक्शनल या फ्रिक्सन लोसेस के बारे में

फ्रिक्शनल या सरफेस फ्रिक्सन लोसेस, डक्ट की लम्बाई बढ़ने के साथ बढ़ते है, जिससे हवा के प्रेसर में कमी आती है जब हवा के बहाव की दिशा में परिवर्तन होता है तो हवा प्रेसर लॉसेस में वृद्धि हो जाती है | जब duct system में हवा 90 डिग्री कोण पर मुड़ती है

तो प्रेसर लोसेस, समान लम्बाई की सीधी डक्ट की अपेक्षा काफी अधिक होते है इसके लिए सर्प कॉर्नर बेंड की अपेक्षा रॉउण्डेड आउटर कार्नर बैंड का प्रयोग किया जाता है

Duct system kya hai

इसे एक उदाहरण के द्वारा समझा जा सकता है मानाकि एक कार बहुत तेज स्पीड से हाई वे पर चल रही है जब कार एक 90 डिग्री कोण पर आती है तो यहाँ कार के स्पीड को काफी कम करना अनिवार्य हो जाता है

इस स्थिति में तेज दौड़ रही कार की शक्ति का एक बढ़ा भाग, बैरेक के द्वारा सोख लिया जाता है | इस मोड़ को पार करने के बाद वापस कार को तेज स्पीड में लाया जा सकता है लेकिन इससे अधिक ईंधन की खपत होती है

लेकिन इस 90 डिग्री कोण के स्थान पर एक समूद कर्व होता तो कार की स्पीड तो कम करनी पड़ती लेकिन 90 डिग्री के कोण के बराबर नहीं | इससे ईंधन की क्षति अपेक्षाकृत कम होती |

यही सिद्धांत हवा के बहाव के समय डक्ट में प्रयोग किया जाता है | इससे हवा के प्रेसर में अपेक्षाकृत कम स्थिति होती है यदि एयर डिट्रिब्यूशन में डक्ट लगते समय स्थान की कमी के कारण रॉउण्डेड कर्व बेण्ड लगाना संभव न हो तो वह सर्प राइट एंगल बेण्ड में आंतरिक रूप से टर्निंग वेन्स लगाकर प्रयोग किया जा सकता है

डक्ट साइज में सिकुड़न या फैलाव के कारण गति में परिवर्तन

जब एक बड़े साइज की डक्ट के साथ छोटे साइज की डक्ट या छोटे साइज की डक्ट के साथ बड़े साइज के डक्ट को सीधे ही 90 डिग्री कोण के साथ जोड़ दिया जाता है तो इससे हवा का प्रेसर कम हो जाता है

इससे जो लॉसेस उतपन्न होते है, उन्हें एड़ी लोसेस (Eddy Losses) कहते है |

इस प्रेसर लोड को डक्ट में कर्मोत्तर बढ़ोतरी या कमी करके कम किया जा सकता है इसके डक्ट के टुकड़ो को फेब्रिकेट करके कप्लर के रूप में जोड़ा है | इससे डक्ट के अंदर साइड्स में एंगल का स्लोप बन जाता है, जिससे प्रेसर में होने वाले लॉसेस काफी कम हो जाते है

सावधानियाँ

  • डक्ट की लम्बाई को सीमित करने और घर्सणीय क्षति (Frictional Losses) को न्यूनतम करने के लिए जितना संभव हो, सके उतना डक्ट रूप सीधा होना चाहिए |
  • घर्षणीय क्षति और सौर लेवल को न्यूनतम करने के लिए हवा की गति को पर्याप्त सत्तर तक लो रकना चाहिए |
  • हवा की दिशा बदलने के लिए लम्बे रेडियस वाले बेण्ड का प्रयोग किया जाना चाहिए |
  • डक्ट साइज में सिकुड़न या फैलाव करने के लिए सही तरीके से फेब्रिकेट किये गए ट्रांसफॉर्मेशन पीसेस का प्रयोग करना चाहिए |
  • चूँकि एक रफ सतह की अपेक्षा एक चिकनी (Smooth) सतह हवा के बहाव में कम रूकावट उतपन्न करती है अतः डक्ट्स को बनने के लिए गोलवेनाइड्स आयरन या एल्युमीनियम मेटल शीट का प्रयोग करना चाहिए |

डक्ट फेब्रिकेशन (Duct Febrication)

डक्ट की संरचना के लिए सामान्यतया गोलवेनाइड स्टील शीट का प्रयोग किया जाता है इसके आलावा जब डक्ट का वजन कम रहना होता है तो एलुमिनियम शीट का प्रयोग किया जाता है

नमी (Moisture) के लिए एल्युमीनियम आपेक्षाकृत अच्छी रेजिस्टेंस होती है | नमी के आदिकतम रेसिटेंस के लिए विषेस उपयोगो में स्टेनलेस स्टील का प्रयोग किया जाता है

एक्जॉस्ट डक्टस के लिए मोटी ब्लैक माइल्ड स्टील शीट का प्रयोग किया जाता है इंडस्ट्रियल उपयोगो जैसे टेक्टसटाइल मिल्स के लिए ीुमिडिफिकेशन प्लांट्स के लिए दीवारों के बीच ईंट पत्थर (Masonary) डक्ट का प्रयोग किया जाता है

उपलब्ध स्थान की परिस्थिति के अनुसार बन जाने के कारण सामान्यतया रेक्टेंगुलर डक्ट प्रयोग किये जाते है राउंड डक्ट अधिक दक्ष होते है क्योँकि इनकी हवा के बहाव की रेजिस्टेन्स, सामान क्रॉस सेक्शन एरिया की रेक्टेंगुलर डक्ट की अपेक्षा कम होती है

इसकी सकती और कठोरता (Rigidity) अच्छी होती है और रेक्टेंगुलर डक्ट के समतुल्य क्रॉस सेक्शनल एरिया के लिए अपेक्षाकृत कम शीट की आवशयकता होती है |

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Conclusion (निष्कर्ष)

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