इतिहास किसे कहते है इसके अर्थ, स्वरूप और परिभाषा

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आज हम जानने वाले है भारत के इतिहास से रेलेटेड कुछ रोचक बाते कि इतिहास किसे कहते हैं इतिहास के जनक कौन हैं? इतिहास कितने प्रकार के है? इतिहास का क्या महत्व है? इतिहास का क्षेत्र क्या है? पूरी जानकारी इस पोस्ट के जरिये समझने की कोशिस करेंगे।

चलिए जानते है

इतिहास किसे कहते है

इतिहास किसे कहते है
इतिहास किसे कहते है

भारतीय इतिहास का महत्व: इतिहास क्या है? यह अत्यंत सरल प्रश्न है परन्तु उसका उत्तर भी जटिल है, क्योँकि अभी तक कोई भी परिभाषा निश्चित नहीं की जा सकी है, लेकिन फिर भी इतिहासकारों ने अपने-अपने दंड से इतिहास को परिभाषित करने का प्रयत्न किया है, जिसके विस्य में आगे विचार किया जायेगा। सवप्रथम हमने इतिहास की उत्पत्ति एवं अर्थ के विषय में वर्णन किया है

इतिहास के उद्देश्य

इतिहास अध्ययन का मुख्य उद्देश्य इतिहास की उत्पत्ति, इतिहास का अभिप्राय व इतिहास का छेत्र व उसके विषय में जानकारी प्राप्त करना है

इतिहास शब्द की उत्पत्ति (भारतीय इतिहास की परिभाषा)

इतिहास शब्द की उत्पत्ति ”इति + ह + आस” इस तीनो शब्दो से निष्पन्न है, जिसका अर्थ वृतांतो को हम विश्वास के साथ प्रमाणित कर सके, उसे इतिहास की श्रेणी में रखा जा सकता है

आचर्य दुर्ग ने अपनी निरुक्त भाष्य वृत्ति में इति + ह + आस की व्याख्या में लिखा है कि ”इति हेवमासीदिति य: कथ्यते से इतिहास:” अर्धरथ यह निश्चित रूप से इस प्रकार हुआ था, यह जो कहाँ जाता है, वह इतिहास है

व्युत्पत्ति की दृष्टि से जर्मन शब्द Geschichte इतिहास शब्द की उत्पत्ति मानी गई है जिसका अर्थ है- विगत घटनाओं का विशेष एवं बोधगम्य विवरण

ग्रीक भाषा का ‘हिसतोरे’ शब्द उस विशेसग्य के लिए प्रयुक्त होता था, जिससे वाद-विवाद के निर्णय के लिए निवेदन किया जाता था. History शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग हेरोडोटस ने किया था, इसलिए कतिपय विधमान इसे इतिहास का जनक मानते है

History शब्द से हेरोडोटस का प्रयोजन गवेष्णा एवं अतिरिक्त अनुसन्धितया ‘हिस्ट्री’ की परिभाषा में हुई

इतिहास का अर्थ एवं स्वरूप 

इतिहास के अर्थ के सम्बन्ध में मतैक्य नहीं है. कार्ल आर, पापर जैसे विधमान का मत है कि किसी लक्ष्य के आभाव में इतिहास अर्थहीन है, क्योँकि व्यक्ति आपने लक्ष्य को इतिहास पर आरोपित करता है.

इतिहासकार द्वारा इतिहास को अर्थ प्रदान किया जाता है. इतिहास के तथ्यों को अर्थ प्रदान करने का कार्य इतिहासकार द्वारा होता है. इतिहास की व्याख्या है, जिसमे अर्थ की सत्ता संभाव्य नहीं है

इतिहास के अर्थ के सम्बन्ध में कतिपय विद्वानों ने यह स्वीकार किया है कि इतिहास में अर्थ होता है. श्री ए. कलहर ने पापर के विचारो की आलोचना करते हुए लिखा है कि इतिहास अर्थपूर्ण होता है. एक राष्ट्र आपने जनो से सारेस्ट होता है. समाज में अधिक मनुष्य की अपेक्षा कतिपय व्यक्ति निश्चित ही अधिक महत्वपूर्ण होते है

इतिहास की प्रकृति और क्षेत्र  (इतिहास के प्रकार)

वर्तमान के सन्दर्भ में अत्तीत के भूगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक आदि अनेक दसाओ का उत्तर दे पाना इतिहासकार के लिए एक कठिन कर्म है, इसलिए इतिहासकारो ने अतीत की स्थितियों एवं परिस्थितियों का उत्तर देने के लिए ऐतिहासिक क्षेत्र का वर्गीकरण किया है

सामाजिक इतिहास

ट्राविलियन प्रथम व्यक्ति था जिसने सामाजिक इतिहास के महत्व को समझते हुए कहा है कि Without social history, economic history is bassen and political history is unintelligible अथार्थ सामाजिक इतिहास के आभाव में आर्थिक इतिहास बंजर तथा राजनीतिक इतिहास अवर्णीय है

राजनीतिक इतिहास

राज्य संस्था आपने विभन्न रूपों में प्राचीन काल से ही इतिहासकारों के लिए रुचिकर रही है, इसलिए श्री राउज ने इसे इतिहास का मेरुदंड स्वीकार करते हुए कहा है कि इतिहास में राजनीती का इतिहास सबसे मनोरंजन विस्य है

किसी समाज अथवा देश के इतिहास में राजनीतिक इतिहास से ही हम उस सभ्यता का अनुमान लगाते है

आर्थिक इतिहास

इतिहास के क्षेत्र में आर्थिक इतिहास को 19वीं शताब्दी में स्वीकार किया गया. एडम स्मिथ ने wealth of nations लिखकर इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया। आर्थिक इतिहास के महत्त्व को प्रस्तुत करने में कॉन्डोरसे, कोम्ते, वर्कले तथा कर्ल्स माकर्स का सर्वाधिक योगदान रहा है

धार्मिक इतिहास

अधिकांश इतिहासकारों ने धार्मिक भावनाओं से प्रेरित होकर इसे इतिहास का एक अंग स्वीकार किया है. यूरोपीय विधमानो द्वारा भारत के वैदिक धर्म पर सर्वाधिक पुस्तके लिखी है. धार्मिक विषयों का विवरण प्रोटेस्टेंट तथा कैथोलिक इतिहासकारों ने दिया है

संस्कृति इतिहास

किसी स्थान और काल में घटिक समग्र राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक दशाएं अलग-2 न होकर सम्पूर्ण रूप से परिवर्तन की उत्तरदाई होती है. लेकिन सांस्कृतिक इतिहास को विशेषता प्रदान करने के लिए रीती-रिवाज, संस्कार, शिक्षा, साहित्य भाषा, लिपि कला, संगीत तथा आमोद-प्रमोद के साधनो के विकास का अध्यन किया जाता है

राजनयिक इतिहास (कूटनीतिक इतिहास)

राजनीतिक इतिहास की एक शाखा के रूप में राजनयिक इतिहास को स्वीकार जाता रहा है, परन्तु 19वीं सदी से इतिहासकारों ने राजनयिक इतिहास लेखन की अव्सय्कता का अनुभव किया। इसके अंतरगर्त विदेश निति, रष्ट्रो के परस्पर सम्बन्ध, राष्ट्रों के मध्य आदान प्रदान की गई संधियों, बहुमूल्य पत्रों का अध्ययन किया जाता है

सैनिक इतिहास

सैनिक इतिहास को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना गया है, क्योँकि राज्य के उत्थान एवं पतन के कारण सैनिक कारण रहे है. नेपोलियन, मुसोलिनी तथा हिटलर जैसे सेनानायकों के उत्थान-पतन में सैनिक गतिविधिया भी उत्तरदाई रही है. सैनिक गतिविधियों ने मानव समाज को सर्वाधिक प्रभावित किया है. आजकल सैनिक इतिहास का क्षेत्र निरंतर विस्तृत होता जा रहा है

औपनिवेशिक इतिहास

यह 19वीं शताब्दी की देन है. औद्योगिक क्रांति के पश्चात यूरोप में शक्तिसाली राष्ट्रों ने एशिया, अफ्रीका व दक्षिण अमेरिका का उपनिवेश स्थापित किये। इन राष्ट्रों के मध्य उपनिवेश विस्तार के लिए प्रतिस्पर्धा होने लगी, जिससे अंतर्राष्ट्रीय स्थिति तनावपूर्ण हो गई. इतिहासकारों का धयान इन उपनिवेशवादियों की और गया, जिसके परिणाम स्वरूप औपनिवेशिक इतिहास लेखन प्रारम्भ हुआ

बौद्धिक इतिहास

प्रो। बैनर्स का कथन है कि मानव मस्तिष्क ने सम्पूर्ण मानवता के व्यवहार एवं मस्तिष्क को सर्वाधिक प्रभावित किया है और मानवीय संस्कृति के एकात्मक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. अतः मानव मस्तिष्क के विकास का अध्ययन आवशयक है. इतिहास का यह प्रकार आपने में एक नई दिशा है

कला का इतिहास

इतिहास के क्षेत्र में कला का इतिहास वर्तमान इतिहास की एक विसिष्ट विद्या है. आधुनिक इतिहास दर्शन का एक महत्वपूर्ण अंग है. सर पिलंदर्स (The Revolution of civilization) ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया कि संस्कृति के प्रारंभिक काल में वास्तुकला और मूर्तिकला का विकास होता है

कॉमन बेल्थ का इतिहास

ब्रिटिश सम्राज्य के पतनोपरांत इंग्लेंड की सरकार का प्रयास था कि इंग्लैंड तथा उसके स्वतंत्र सम्राज्य सम्बन्धी राष्ट्रों के मध्य किसी प्रकार का औपचारिक सम्बन्ध बना रहे. इसी उस्द्देस्य से कॉमन वेल्थ की स्थापना हुई और कॉमन वेल्थ इतिहास ब्रिटिश सम्राज्य की देन है

विश्व इतिहास

प्रारंभ में किसी वयक्ति ने विश्व इतिहास लिखने का प्रयत्न ही नहीं किया, परन्तु 20वीं शताब्दी में जब लोगों ने विश्व भृतत्वाद के सिद्धांत को स्वीकारा, तब इतिहासकारों ने अपनी सम्पूर्ण भूमिका प्रस्तुत की. इस दिशा में यूनेस्को ने महत्वपूर्ण प्रयास किया

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अंतिम तथ्य

आशा करता हूँ कि इतिहास किसे कहते है और इतिहास नाम कैसे पढ़ा इतिहास के क्या-क्या अर्थ और परिभाषा और क्षेत्र रहे है कि पूरी जानकारी मिल गई होगी। ऐसी ही और रोचक जानकारी के लिए हमें सब्सक्राइब करें

आर्टिकल को लास्ट तक पढ़ने के लिए Thanks!

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