जमात उल विदा का क्या है क्योँ मनाया जाता है ये मुसलमानों के लिए इतना खास क्योँ है?

दोस्तों आज हम बात करने वाले है जमात उल विदा के बारे में कि जमात उल विदा का क्या है क्योँ मनाया जाता है ये मुसलमानों के लिए इतना खास क्योँ है? इसी टॉपिक पर आज हम बात करने वाले है| दोस्तों यह रमजान के महीने में आने वाला पर्व है जिसे मुस्लमान लोग बढे ही धूम धाम से मनाते है

जमात उल विदा का क्या है
जमात उल विदा का क्या है क्योँ मनाया जाता है ये मुसलमानों के लिए इतना खास क्योँ है?

जमात उल विदा का क्या मतलब है (What is the Meaning of Jamat ul vida)

जमात उल विदा एक अरबी शब्द है जिसका मतलब है कि जुम्मे की विदाई इस पर्व को पूरे विश्व भर के मुस्लिमों द्वारा काफी धूमधाम तथा उत्साह के साथ मनाया जाता है यह पर्व रमजान के अंतिम शुक्रवार यानी जुम्मे के दिन मनाया जाता है वैसे तो पूरे रमजान के महीने को काफी पवित्र माना जाता है

जमात-उल-विदा का महत्व (Signficance of Jamat ul vida)

जमात उल विदा के इस मौके पर रखे जाने वाले इस रोजे का अपना ही महत्व है इस दिन देशभर के मस्जिदों में नमाज पढ़ने वालों की भारी भीड़ देखने को मिलती है क्योंकि ऐसा माना जाता है ”कि जो भी व्यक्ति इस दिन को अल्लाह की इबादत में बिताता है उसे अल्लाह की विशेष रहमत प्राप्त होती है और अल्लाह उसके हर गुनाहों को माफ कर देता है” दोस्तों वर्ष 2022 में जमात उल विदा का पर्व 28 April शुक्रवार को मनाया जाएगा

Jamat ul vida मुस्लिम समुदाय का एक प्रमुख पर्व है यह त्योहार रमजान के आखिरी शुक्रवार को मनाया जाता है इस दिन की नमाज का मुस्लिम समुदाय में विशेष महत्व माना गया है इस पर्व को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दिन पैगंबर मोहम्मद साहब ने अल्लाह की विशेष इबादत की थी यही कारण है कि इस शुक्रवार को बाकी के जुम्मे के दिनों से ज्यादा महत्वपूर्ण बताया गया है

ऐसा माना जाता है कि जमात उल विदा के दिन जो लोग नमाज पढ़कर अल्लाह की इबादत करेंगे और अपना पूरा दिन मस्जिद में बिताएंगे उसे अल्लाह की विशेष रहमत और बरकत प्राप्त होगी दोस्तों इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस दिन अल्लाह अपने एक फरिश्ते को मस्जिद में भेजता है जो कि लोगों की नमाज को सुनता है और उन्हें आशीर्वाद देता है

इस दिन लोग साफ-सुथरे कपड़े पहनकर मस्जिद में नमाज अदा करने जाते हैं और अल्लाह से अपने पापों के लिए क्षमा मांगते हैं और भविष्य में सही मार्गदर्शन के लिए दुआ करते हैं इस दिन के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ऐसी मान्यता है इस दिन खुद आसमान से फरिश्ते आते हैं क्योंकि रमजान का यह पवित्र महीना समाप्त होने वाला होता है

यही कारण है इस्लाम धर्म के अनुयायियों द्वारा जमात उल विदा इस पर्व को धूमधाम के साथ मनाया जाता है इस त्यौहार को इस्लाम धर्म में काफी विशेष स्थान प्राप्त है रमजान महीने के आखिरी शुक्रवार को मनाया जाने वाला पर्व को लेकर ऐसा माना जाता है इस दिन जो भी व्यक्ति अपना समय नमाज पढ़ते हुए बिताता है उसे अल्लाह की विशेष कृपा होती है और पूरे समय उसकी रक्षा करते हैं और उसे बरकत देते हैं

Jamat ul vida मनाने का तरीका (How to Celebrate Jamat ul vida)

Jamat ul vida के पर्व को मनाए जाने का एक तरीका और रीति रिवाज है मस्जिद और दरगाह में काफी संख्या में श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं इस दिन को मनाने को लेकर मस्जिदों में कई विशेष तैयारियां की जाती हैं जुम्मे के दिन मस्जिदों में काफी चहल कदमी देखने को मिलती है

इस दिन में काफी भीड़ इकट्ठा होती है इस दिन लोग समूहों में नमाज पढ़ने जाते हैं जहां वह नमाज पढ़ते हैं और अल्लाह से प्रार्थना करते हैं| इन लोग अपने प्रियजनों के सुख शांति के लिए भी दुआ करते हैं ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति किसी गरीब को खाना खिलाता है उसे अल्लाह की विशेष कृपा प्राप्त होती है

इन लोगों द्वारा काफी जम कर खरीदारी भी की जाती है जिसमें की खरीदारी अवश्य होती है इस दिन ज्यादातर रोजेदार नए कपड़े पहनकर नमाज पढ़ने जाते हैं और कई लोगों द्वारा मस्जिद में पढ़ने से पहले घर में भी कुरान पढ़ी जाती है दोस्तों इसके साथ ही इस दिन दान करने से काफी पुण्य प्राप्त होता है

इसलिए इन लोगों द्वारा जरूरतमंदों और गरीबों को दान भी दिया जाता है दोस्तों वैसे तो जमात उल विदा के पर्व में आज के समय में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया है कि वर्तमान में इसका स्वरूप पहले की अपेक्षा और भव्य और विस्तृत हो गया है इस पर मुस्लिमो द्वारा काफी धूमधाम के साथ मनाया जाता है इस दिन और मजारों पर काफी चहल कदमी देखने को मिलती है क्योंकि इस दिन कई सारे लोग एक साथ नमाज अदा करने जाते हैं

इस दिन लोग अपने गलत कार्यों से तौबा करते हैं और अल्लाह से खुद के लिए और अपने परिवार के लिए प्रार्थना करते हैं जमात उल विदा के दिन लोग अपने कार्यों का मंथन भी करते हैं हालांकि आज के समय में बढ़ती आबादी के कारण सभी लोगों के लिए मस्जिद में नमाज लोग अपने कार्यों का आत्ममंथन भी करते हैं हालांकि आज के समय में बढ़ती आबादी के कारण सभी लोगों के लिए मस्जिद में नमाज के लिए जगह बना पाना संभव नहीं है

इसलिए इस दिन मस्जिदों में मस्जिद की इमारत के बाहर तंबू बनाए जाते हैं ताकि भारी संख्या में इकट्ठा हुए लोग बिना किसी समस्या के साथ जमात अलविदा की नमाज अदा कर सकें| हमें इस बात का अधिक से अधिक प्रयास करना चाहिए कि जमात अलविदा के इस पर्व का यह पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप इसी तरह से बना रहे क्योंकि यही इसके लोकप्रियता का आधार स्तंभ है

वैसे तो पूरे साल भर जुम्मे की नमाज को खास माना जाता है रमजान का आखिरी जुम्मा या फिर जिसे जमात उल विदा के नाम से भी जाना जाता है उसका अपना अलग ही महत्व है क्योंकि यह दिन पूरे रमजान का दूसरा सबसे पवित्र दिन है ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति माता के दिन सच्चे मन से नमाज पढ़ता है और अल्लाह से अपने पिछले गुनाह माफी मांगते हैं उसकी दुआ जरूर पूरी होती है इसलिए जमात-उद-दावा दत्त के दिन के रूप में भी जाना जाता है

इस दिन अपना पूरा दिन ही अल्लाह की इबादत में बिता देते हैं इसके साथ ही इस दिन को लेकर यह मान्यता भी है कि इस दिन नमाज पढ़ने वाले व्यक्ति को जन्म से मुक्ति मिलती है और सच्चे दिल से इबादत करने वालों की इच्छा भी पूरी होती है यही कारण है कि जमात के इस पर्व को इस्लामिक पर्व में इतना महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है

जमात अलविदा का यह पर्व काफी पुराना है कुरान शरीफ में इस पर्व का जिक्र किया गया है| रमजान के आखिरी को मनाए जाने वाले इस पर्व को पूरी दुनिया में मुस्लिम समुदाय द्वारा काफी जोश और उत्साह के साथ मनाया जाता है

इस दिन महिलाओं और पुरुषों द्वारा मस्जिदों में नमाज पढ़ी जाती है वास्तव में इस दिन को काफी धार्मिक मान्यता है कि इस पैगम्बर मोहम्मद ने अल्ल्हा से इबादत की थी|इस दिन मुसलमान अल्लाह की इबादत में बिताते हैं इनके में ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति गरीबों को दान देते हैं उन्हें खाना खिलाता है उसे अल्लाह की रहमत प्राप्त होती है

इस दिन बहुत सारे नमाज पढ़ने वाले तथा अल्लाह की बात करने के साथ ही लोगों को खाना खिलाना चादर और कंबल बांटने से पुण्य के काम भी करते हैं क्योंकि इस दिन इस तरह के कार्य करने से अन्य दिनों की अपेक्षा कई गुना पुण्य प्राप्त होता है यही कारण है कि कई सारे लोग इस दिन कार्य करते हैं जमात में किए जाने वाले कार्यों के महत्व को खुद कुरान शरीफ में रमजान का यह पर्व आप लोगों को आमंत्रण के लिए प्रेरित करता है

ताकि वह अपने अच्छे बुरे कर्मों के विषय में सोच सके और अपने बुरे कार्यों से तौबा कर सके ऐसा माना जाता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति नमाज पढ़ते हुए सच्चे दिल से अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगता है उसके पापों का अल्लाह द्वारा क्षमा कर दिया जाता है

अपने इन्हीं धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण जमात उल विदा के इस पर्व को इस्लाम धर्म के अनुयायियों द्वारा इतना महत्वपूर्ण माना जाता है

आज आपने क्या सीखा

तो दोस्तों उम्मीद करता हूं इस पोस्ट में मैंने आपको जमात उल विदा का क्या मतलब है से जुड़ी सारी छोटी-बड़ी जानकारी अच्छे से दे दी होगी| दोस्तों अगर आप लोगों यह पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे लाइक करें अपने सारे friends से रिलेटिव हर जगह शेयर करें| ताकि उनको भी यह जानकारी मिल सके

दोस्तों कमेंट बॉक्स में आप लोगों को यह पोस्ट कैसी लगी और आप यदि मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखते हैं तो इस दिन के बारे में जो भी आप लोगों के लाए हैं हमें कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताएं

आपका दिन शुभ हो

Jamat ul vida 2022 में कब है?

2022 में जमात उल विदा 28 अप्रैल वीरवार के दिन मनाया जायेगा

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