Refrigeration System Kya Hai? इसके प्रकार और प्रक्रिया

हेलो दोस्तों क्या आप refrigeration system के बारे में जानते हो अगर नहीं तो ये पोस्ट पढ़ने के बाद आपको refrigeration system के बारे में पूरी जानकारी हो जाएगी आज हम आपको बतायेगे की refrigeration system kya hai? रेफ्रिजरेशन सिस्टम का क्या use है पूरी जानकारी इस पोस्ट में मिल जाएगी इसके लिए आपकी इस पोस्ट को लास्ट तक पढ़ना होगा

Refrigeration system

Refrigeration System Kya Hai – What is Refrigeration System

मेकेनिकल रेफ्रिजरेशन सिस्टम , एटमोस्फियरिक टेम्प्रेचर की अपेक्षा, लोअर टेम्प्रेचर को उतपन्न करने और कण्ट्रोल करने का कार्य करता है इस प्रकार रेफ्रिजरेशन, उसमे को लो लेवल तक लाने और इसे हाई टेम्प्रेचर में मिलाने की विधि है

अपनी प्रकृति के अनुसार उसमे उच्च ताप से निम्न ताप की और बहती है लेकिन जब इसे निम्न ताप से उच्च ताप की और गति देनी होती है तो इसके लिए अतिरिक्त ऊर्जा की आवशयकता होती है इस बात को हम पानी की दो टंकियों के बीच पानी के बहाव के उदाहरण से समझ सकते है

उदाहरण

  • मानकी दो टंकियों A और B को अलग-अलग लेवल पर रखा गया है टंकी A ऊंचाई पर रखी है
  • जबकि टंकी B ग्राउंड लेवल से एक मीटर ऊंचे स्थान पर रखी है
  • यहाँ टंकी A से टंकी B में पानी लाना बहुत आसान है
  • लेकिन टंकी A से टंकी B में पानी ले जाने के लिए हमें अतिरिक्त श्रम की आवशयकता होगी
  • इसके लिए टंकी B में बाल्टियों में पानी भर भर कर टंकी में डालना होगा

टेम्प्रेचर लेवल

इसी प्रकार एक लो टेम्प्रेचर लेवल (रेफ्रिजरेटर) से हाई टेम्प्रेचर लेवल (एटमॉस्फियर) में उस्मा का बहाव बनाने के लिए बाहरी ऊर्जा की आवशयकता होती है और इसके लिए एक ऐसे पदार्थ की आवशयकता होती है जो उसमे के कॅरियर के रूप में कार्य करते है

यदि हम रेफ्रिजरेशन की तुलना,पानी की टंकियों के उदहारण से करे लो लेवल का रेफ्रिजरेटर, टंकी के रूप में, हाई टेम्प्रेचर की एटमोस्फिरिक एयर, टंकी A के रूप में और बाल्टी, हीट कैरियर के रूप में कार्य करती है जिस प्रकार टंकी B के पानी को आसानी से बाल्टी में भरा जा सकता है क्योकि बाल्टी B टंकी से लो लेवल पर होती है ठीक उसी प्रकार रेफ्रिजरेटर की गर्मी आसानी से हीट केरियर में आ जाती है क्योकि हीट कॅरियर, रेफ्रिजरेटर की अपेक्षा लो टेम्प्रेचर पर होता है, जिससे ऊष्मा रेफ्रिजरेटर से हीट कैरियर में आसानी से आ सकती है

अब, जिस प्रकार टंकी B से बाल्टी को भरकर टंकी A में डालते है और बाल्टी पुनः टंकी B से भरने के लिए खाली हो जाती है ठीक उसी प्रकार जब हीट कॅरियर, बाहरी वातावरण के सम्पर्क में आता है तो चूँकि इस समय हीट कैरिएर का ताप, बाहरी वातावरण में हाई होता है अतः हीट कैरियर का ताप, बाहरी वातावरण में चला जाता है और हीट कैरिएर पुनः अपने सामान्य ताप पर आ जाता है तथा यह रेफ्रिजरेटर से पुनः उष्मा हटाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है इस प्रकार हीट-कैरियर, रेफ्रिजरेटर की उष्मा को बाहरी वातावरण में निकालने का कार्य करता है इस कॅरियर को refrigeration system कहते है

रेफ्रिजरेशन में प्रयोग किये जाने वाले सिस्टम

रेफ्रिजरेशन में कई सिस्टम प्रयोग किये जाते है, जैसे वेपर कम्प्रेसन सिस्टम, एब्जोपसर्न सिस्टम, स्टीम जेट रेफ्रिजरेशन सायकल आदि | भारत में रेफ्रिजरेशन के लिए वेपर कम्प्रेशन सिस्टम विस्तृत रूप से प्रयोग किया जा सकता है

वेपर कम्प्रेसन सिस्टम की कार्य प्रणाली (रेफ्रिजरेशन सायकल)

एक सिलेंडर में तरल रेफ्रिजरेंट (R-12) प्राप्त करके तथा इसे एक पाइप कवाईल (या अवेपोरेटर) के अंदर से गुजार क्र एक सामान्य वेपर कम्प्रेसन रेफ्रिजरेशन प्राप्त किया जा सकता है यह रेफ्रिजरेंट एवोपरेटर के आसपास के स्थान से आवशयक उष्मा को सोखकर उबलने लगता है जिससे वह स्थान ठंडा हो जाता है ेवापोरेटर में इस प्रकार बनी गैस को वातावरण में छोड़ा जा सकता है इसलिए ेवोपोरेटर के अंदर R-12, -29.4C (-21F) के ताप पर उबलने लगता है जिससे वह स्थान ठंडा हो जाता है ेवोपरेटर में इस प्रकार बनी गैस को वातावरण में छोड़ा जाता है वैसे ही ेवोपोरेटर वातावरण के दबाव के सामान हो जाता है इसलिए ेवोपोरेटर के अंदर R-12, -29.4C (-21F) के ताप पर उबलने लगता है

refrigeration system

मानाकि यह एक एयर कण्डीशनर उपकरण है जहां कमरे का तापमान लगभग 24 डिग्री सेंटीग्रेट (75 डिग्री फरेनाइट) पर स्थिर रहना है यहाँ उबलते हुए रेफ्रिजरेंट R-12, -29.4C और कमरे के ताप में बहुत अधिक अन्तर है हमें लगभग 16 से 19C (30 से 35F) का अंतर चाहिए | इसके लिए यह आवशयक है कि ेवोपोरेटर के अंदर R-12, – 4.4C (40F) के ताप पर उबलने लगे इस ताप को प्राप्त करने के लिए हम ेवोपोरेटर के आउटलेट पर एक हेंड वाल्व लगा सकते है और इसे इस प्रकार एडजेस्ट करते है की ेवोपोरेटर में बनी गैस को वातावरण में स्वतंत्र रूप से जाने देने की अपेक्षा एक कण्ट्रोल किये होए तरीके से निकाला जाये |

इससे ेवोपोरेटर के अंदर एक निस्चित प्रेसर बन जाता है अब तरल R-12, ेवोपोरेटर के बने प्रेसर के अनुसार ताप पर उबलेगा क्योकि प्रेसर बढ़ने से कवथनांक बढ़ जाता है उदाहरण के रूप में यदि ेवोपोरेटर में 2.6 Kg/cm G (37PSIG) प्रेस्सेर बना है तो रेफ्रिजरेंट R-12, – 4.4C (40F) ताप पर उबलेगा और आवशयक उष्मा अपने आसपास के छेत्र में लेगा |

सावधानियाँ

इस प्रकार के refrigeration system में सबसे बढ़ी असुविधा यह है कि इसमें रेफ्रिजरेंट का अधिक नुक्सान होता है क्योकि यह वातावरण में छोड़ा जाता है और सिस्टम में लगातार नया तरल रेफ्रिजरेंट दिया जाना आवशयक होता है रेफ्रिजरेंट की कीमत अधिक होने और पर्यावरण के दृष्टिकोण से इसे वातावरण में छोड़ना सही नहीं है इसके लिए यह आवशयक है कि ेवोपोरेटर से आने वाली गैस को पुनः तरल रूप में बदला जाये और इसे पुनः प्रयोग में लाया जाए |

refrigeration system

यह आवशयक होता है कि ावोपोरेटर में तरल रेफ्रीजेन्ट ही भेजा जाये क्योकि यह केवल वेपोराइजेशन (वप्सीकरण) के द्वारा ही अधिकतम उष्मा को सोख सकता है इसका सरलतम तरीका यह है कि वापसीकृत रेफ्रिजरेंट के ेवोपोरेटर से निकलते ही इसे ठंडा कर दिया जाये रेफ्रिजरेंट वाष्प को ठंडा करने के लिए इसकी उष्मा को किसी दूसरे माध्यम की सहायता से हटा लिया जाता है

इस कार्य के लिए पानी या हवा प्रयोग की जाती है इस पानी या हवा का ताप, रेफ्रीजरेट के ठन्डे किये गये ताप से कम होना चाहिए पहले बताये गए उदारण के अनुसार यदि 4.4C (40 F) पर ेवोपोरेटर से आने वाली रेफ्रिजरेंट को इसी प्रकार ठंडा किया जाता है तो इसी लिए 4.4C (40 F) से कम ताप के पानी या हवा की आवशयकता होगी लेकिन यदि यह कम ताप का पानी या हवा उपलब्ध होती तो मेकेनिकल रेफ्रिजरेशन की आवश्यकता ही नहीं होती

पानी या हवा का ताप

चूँकि उपलब्ध पानी या हवा का ताप, ेवोपोरेटर से आने वाली रेफ्रिजरेट वाष्प के ताप से हमेशा अधिक होता है अतः जब तक की इससे ठन्डे किये जाने वाली ताप स्तर को किसी भी माध्यम से बढ़ाया नहीं जाता, तब तक रेफ्रिजरेंट वाष्प को ठंडा नहीं किया जा सकता है

जैसा कि पहले बताया जा चुका है की वेपर का कन्डेंसिंग पवाइंट, वेपर के प्रेसर को बढ़ा क्र बढ़ाया जा सकता है यदि इससे रेफ्रिजरेंट वेपर के प्रेसर को 2.6Kg/Cm से लगभग 11.25Kg/Cm G तक बढ़ा दिया जाए तो इस उच्च दबाव के प्रेसर को उपलब्ध वातावरणीय एयर के द्वारा ठंडा करके तरल रूप में लाया जा सकता है

इसे वातावरणीय एयर का ताप लगभग 32.2 C (90 F) माना गया है ेवोपोरेटर से आने वाली लो प्रेसर रेफ्रीजेन्ट वेपर में प्रेसर को बढ़ने के लिए कंप्रेसर का प्रयोग किया जाता है और इस प्रेसर वेपर को कंडेंसर में भेजा जाता है

इस कंडेंसर के ऊपर एक फैन के द्वारा हवा दी जाती है, जिससे कंडेंसर में यह हाई प्रेसर वेपर ठंडी हो जाती है तथा तरल रूप में आ जाती है इस समय कंडेंसर में हाई प्रेसर का तरल रेफ्रिजरेंट होता है इसलिए इसे ेवोपोरेटर में भेजने से पहले इससे प्रेसर को कम किया जाता है

ताकि इसको वांछित ताप पर ेवोपोरेटर में बॉयल किया जा सके इसके लिए एक थ्रॉटलिंग, डिवाइस,जैसेकि कैपेलेरी tube थर्मोस्टेट- एक्सपेंशन वाल्व, ऑटोमोटिक-एक्सपेशन वाल्व, फ्लोट वाल्व आदि प्रयोग किये जाते है

रेफ्रिजरेशन सायकल की निम्न क्रियाऐं

  • ेवोपोरेटर में एक कण्ट्रोल किये गए लो प्रेसर का तरल रेफ्रिजरेंट के वापसीकरण के द्वारा उष्मा को सोखा जाता है
  • Evoparotor से आने वाली लो प्रेसर वेपर के प्रेसर को कम्प्रेस्सेर के द्वारा बढ़ाया जाता है ताकि इसका कंडेंसर टेम्प्रेचर बढ़ाया जा सके
  • कंडेंसर से हाई प्रेसर से उष्मा को हटाना ताकि इस वेपर को तरल रूप में लाया जा सके
  • थ्रॉटलिंग डिवाइस के प्रयोग से, कंडेंसर से प्राप्त हाई प्रेसर तरल रेफ्रिजरेंट के प्रेसर को ेवोपोरेटर में आवशयक प्रेसर उतपन्न करता है

रेफ्रिजरेशन सिस्टम में रेफ्रिजरेंट के बहने के लिए कंप्रेसर दो प्रकार के प्रेसर्स उतपन्न करता है-

  1. डिस्चार्ज प्रेसर (Discharge Pressure)
  2. सक्शन प्रेसर (Suction Pressure)
  1. डिस्चार्ज प्रेसर : इस प्रेसर की दिशा, कंप्रेसर से कंडेंसर की तरफ होती है इस दिशा में कंप्रेसर रेफ्रिजरेंट को ढकेलता है
  2. सक्शन प्रेसर : इस प्रेसर की दिशा में थ्रॉटलिंग डिवाइस से कंप्रेसर की ऑफ़ होती है इस दिशा में कंप्रेसर रेफ्रिजरेंट को अपनी और खीचता है
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रेफ्रिजरेंट सायकल

किसी रेफ्रिजरेशन सिस्टम में रेफ्रिजरेंट किन किन परिस्थितियों और परिवर्तन किया जाता है तथा इससे रेफ्रिजरेंट सायकल कहा जाता है

  1. ओपन सायकल (Open Cycle)
  2. क्लोस्ड सायकल (Closed Cycle)

ओपन सायकल

इस प्रकार की सायकल में तरल रेफ्रिजरेंट को ेवोपोरेटर में लाकर वाष्प में प्रवर्तित किया जाता है इसके बाद यह वाष्प वातावरण में निकाल दी जाती है यदि इस ेवोपोरेटर को इस डब्बे में रख दिया जाए तो वह डब्बा और उसका आंतरिक वातावरण ठंडा हो जायेगा इस सिस्टम में सबसे बढ़ी आसुविद्या यह है की इसमें रेफ्रिजरेंट को बार बार बदलना पड़ता है इससे यह काफी खरचीला हो जाता है

ओपन सायकल रेफ्रिजरेंट सायकल को हम एक सामान्य उदहारण से समझ सकते है गर्मी की मोसम में मीठी के घड़े में पानी को ठंडा करना एक जाना पहचाना उदाहरण है जो ओपन सायकल रेफ्रिजरेंट के सिद्धांत पर कार्य करता है इसमें पानी घड़े के छोटे-छोटे छिद्रो से बाहरी सतह पर आ जाता है वाष्पीकृत होता है तथा घड़े के पानी से उष्मा को सोखता है चूँकि यहाँ रेफ्रिजरेंट (पानी) बाहरी वातावरण में निकल आता है और इससे दोबारा प्रयोग नहीं किया जा सकता इसलिए यह सिस्टम ओपन सायकल कहलाता है

क्लोस्ड सायकल

इस प्रकार के सायकल में वाष्पीकृत रेफ्रिजरेंट को पुनः तरल रूप में लाकर बार-बार प्रयोग किया जाता है इससे रेफ्रिजरेंट बेकार नहीं जाता और व्यर्थ होने का खतरा बचता है निम्न चित्रों में क्लोज़ सायकल refrigeration system के ले-आउट डायग्राम दिखाए गए है-

refrigeration system

इस refrigeration system में, वह स्थान, जिसे ठंडा करना है, उसकी गर्मी को तरल रेफ्रिजरेंट वाष्पीकृत होकर क्वाइल की दीवारों या ेवोपोरेटर के द्वारा सोख लेता है यह वाष्प कंडेंसर में आकर वापस तरल स्थिति में आ जाती है इस प्रकार यह सायकल पूर्ण होता है और लगातार चलता रहता है

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लेखक : आशीष कुशवाहा

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